करियर ऑब्जेक्टिव में क्या लिखें
पहले एक बात साफ कर लें, क्योंकि ज़्यादातर गाइड यह नहीं बतातीं: अगर आपके पास दो साल से ज़्यादा का काम का अनुभव है, तो करियर ऑब्जेक्टिव लिखना ही नहीं चाहिए। उसकी जगह समरी आती है। ऑब्जेक्टिव बताता है कि आप क्या चाहते हैं — और अनुभवी उम्मीदवार से भर्ती करने वाला यह नहीं पूछ रहा। फ्रेशर के लिए ऑब्जेक्टिव ठीक है, क्योंकि दिखाने को काम नहीं है, इरादा है।
तरीका — स्टेप बाय स्टेप
यह मत लिखिए — यह लिखिए
वही बात, दो तरीकों से लिखी हुई। दाईं तरफ वाली से कॉल आती है।
उदाहरण के लिए — किसी ग्राहक का असली रिज्यूम नहीं।
खुद बनाना है तो ऊपर का तरीका काफी है। लेकिन अगर आधे घंटे बाद भी पहला पैराग्राफ ठीक नहीं लग रहा — तो यही सबसे आम अनुभव है, और इसमें कोई शर्म नहीं।
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₹99 में लिखवाइएअक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या करियर ऑब्जेक्टिव लिखना ज़रूरी है?
नहीं। यह वैकल्पिक है, और अनुभवी लोगों के लिए तो नुकसानदेह है क्योंकि सबसे कीमती जगह बिना जानकारी के भर जाती है। फ्रेशर के लिए यह उपयोगी है।
ऑब्जेक्टिव में कंपनी का नाम लिखें?
अगर आप हर आवेदन के लिए रिज्यूम बदल रहे हैं तो हाँ, इससे लगता है कि आपने सोच-समझकर भेजा है। लेकिन नाम बदलना भूलना सबसे आम और सबसे भारी गलती है — ध्यान न रख पाएं तो नाम न लिखें।